Class 8 Hindi Chapter 11 Surdas ke Pad Vyakhya सूरदास के पद पाठ की व्याख्या काव्यांश 1 मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी? किती बार मोहिं दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी। तू जो कहति बल की बेनी ज्यौं, ह्नै है लाँबी-मोटी। काढ़त-गुहत न्हवावत जैहै, नागिन सी भुइँ लोटी। काचौ दूध पियावत पचि-पचि, देति न माखन-रोटी। सूर चिरजीवौ दोउ भैया, हरि-हलधर की जोटी। शब्दार्थ कबहिं – कब | किती – कितनी | पियत – पिलाना | अजहूँ – आज भी | बल – बलराम | बेनी – चोटी | लाँबी-मोटी – लंबी-मोटी | काढ़त – बाल बनाना | गुहत – गूँथना | न्हवावत – नहलाना | नागिन – नागिन | भुइँ – भूमि | लोटी – लोटने लगी | काचौ – कच्चा | पियावति – पिलाती | पचि-पचि – बार-बार | माखन – मखक्न | चिरजीवी – चिरंजीवी | दोउ – दोनों | हरि-हलधर – कृष्ण-बलराम | जोटी – जोड़ी प्रसंग – प्रस्तुत पद हमारी हिंदी की पाठ्य पुस...